"शिवाधीन" " कृष्णजरा " -
बाण चलाया समझ के मृग ।
कृष्ण को देखा और -
"जराने आक्रांद व्यक्त किया ।।
तब कहा कृष्ण ने जरा से -
" जो ऊहा अच्छा हुआ "
तूने मुझे मुक्त किया ।।
- ©® मेहुल ब्रह्मभट्ट
"शिवाधीन"
उसने बदला नहीं अपनोका भाग्य ।।
वो देखता रहा बस उनका दुर्भाग्य ।।
वो कहता रहा अपनोको हर पल ।।
जैसा कर्म वैसा ही मिलेगा फल ।।
- ©® मेहुल ब्रह्मभट्ट