Saturday, 23 July 2022

"शिवाधीन" " कृष्णजरा " -

"शिवाधीन" " कृष्णजरा " - 
बाण चलाया समझ के मृग ।
कृष्ण को देखा और -
"जराने आक्रांद व्यक्त किया ।। 
तब कहा कृष्ण ने  जरा से -
" जो ऊहा अच्छा हुआ " 
तूने मुझे मुक्त किया ।। 

- ©® मेहुल ब्रह्मभट्ट

 "शिवाधीन" 
उसने बदला नहीं अपनोका भाग्य ।।
वो देखता रहा बस उनका दुर्भाग्य ।। 
वो कहता रहा अपनोको हर पल ।।
जैसा कर्म वैसा ही मिलेगा फल ।। 
- ©® मेहुल ब्रह्मभट्ट