"शिवाधीन" ये सफर है सुहाना।।
क्या वो हकीकत थी
या फिर एक ख्वाब
जो अंधेरेमें मैंने देखा था
वो दोस्त , वो एहसास
जो मेने महसूस किया था
लगता था हर पल मुझे
वो मेरे आसपास साथ है
जब हुआ सवेरा तो
खुद के साथ था में ...
वो एहसाह वो ख्वाब
बस एक याद बन गया
क्या वो हकीकत थी
या फिर एक फ़साना।।
क्योंकी ये सफर है सुहाना।।
- ©® મેહુલ બ્રહ્મભટ્ટ